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गिर के जंगलों में शेरों की दहाड़ और भी बुलंद: 891 एशियाटिक शेरों की हुई गणना

एशियाटिक शेरों

एशियाटिक शेरों: गुजरात की 2025 शेर जनगणना में गिर और आसपास के क्षेत्रों में 891 एशियाटिक शेर दर्ज किए गए। जानिए इस वन्यजीव संरक्षण की बड़ी सफलता।

गुजरात में एशियाटिक शेरों की संख्या पहुँची 891

गुजरात राज्य ने वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 2025 में संपन्न हुई 16वीं एशियाटिक शेर जनगणना के अनुसार, अब गिर के जंगलों और उससे जुड़े क्षेत्रों में 891 एशियाटिक शेर मौजूद हैं। यह संख्या 2020 में दर्ज 674 शेरों की तुलना में 32% अधिक है, जो दर्शाता है कि संरक्षण प्रयास पूरी तरह सफल हो रहे हैं।

कब और कहाँ हुई एशियाटिक शेरों की जनगणना?

यह ऐतिहासिक शेर जनगणना 10 से 13 मई 2025 के बीच आयोजित की गई थी। इसमें गुजरात के 11 जिलों के 35,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को शामिल किया गया। इस विशाल कार्य में विशेषज्ञों, वन अधिकारियों और सैकड़ों वन रक्षकों की सहभागिता रही।

एशियाटिक शेरों की विस्तृत श्रेणी

इस बार की जनगणना में शेरों की संख्या इस प्रकार रही:

वर्गसंख्या
वयस्क नर शेर196
वयस्क मादा शेर330
किशोर शेर140
शावक (Cub)225
कुल891

गिर से बाहर भी फैला एशियाटिक शेरों का साम्राज्य

जनगणना के अनुसार, अब 507 शेर गिर के जंगलों के बाहर के क्षेत्रों में भी पाए जाते हैं। यह दर्शाता है कि शेर अब पारंपरिक आवास से आगे बढ़ते हुए सौराष्ट्र के नए क्षेत्रों में भी अपना वास बना चुके हैं।

संरक्षण प्रयासों की सफलता

गुजरात सरकार और वन विभाग की निरंतर कोशिशों ने इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संरक्षण योजनाएं, निगरानी तंत्र, चिकित्सा सुविधाएं और बायोलॉजिकल कॉरिडोर जैसे प्रयासों ने शेरों की जीवन गुणवत्ता को बेहतर किया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी पहचान

गुजरात के गिर जंगल एशियाटिक शेरों का एकमात्र प्राकृतिक आवास हैं। शेरों की बढ़ती संख्या ने भारत को वैश्विक स्तर पर वन्यजीव संरक्षण में एक आदर्श उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया है।

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निष्कर्ष

गिर के जंगलों में एशियाटिक शेरों की दहाड़ अब और भी बुलंद हो गई है। 891 की संख्या न केवल एक आंकड़ा है, बल्कि यह दर्शाता है कि सही संरक्षण, सतत प्रयास और सरकारी भागीदारी से किसी भी जीव की प्रजाति को संरक्षित किया जा सकता है।

गुजरात के लिए यह गौरव का क्षण है और पूरे देश के लिए प्रेरणा!

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