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Dangerous Ice Age Predator Comes Back to Life: 13,000 साल बाद हिमयुग का खतरनाक शिकारी वापस ज़िंदा?विज्ञान और तकनीक का चमत्कार

Dangerous Ice Age Predator Comes Back to Life

Dangerous Ice Age Predator Comes Back to Life: प्राचीन हिमयुग के दौरान, डायर वुल्फ (भयानक भेड़िया) को अमेरिका के सबसे ख़तरनाक शिकारी जानवरों में गिना जाता था। इसका शरीर और खोपड़ी सामान्य ग्रे भेड़ियों की तुलना में अधिक शक्तिशाली थी। लेकिन हिमयुग के अंत के साथ ही यह प्रजाति विलुप्त हो गई।

13,000 साल बाद फिर जीवित हुआ डायर वुल्फ!

आज से लगभग 13,000 साल बाद, टेक्सास की कोलोसल बायोसाइंसेज नामक बायोटेक्नोलॉजी कंपनी ने इस विलुप्त प्रजाति को वापस लाने का साहसिक कदम उठाया है। कंपनी ने हाल ही में तीन आनुवंशिक रूप से इंजीनियर किए गए भेड़ियों के पिल्लों के जन्म की घोषणा की है, जिनका डीएनए प्राचीन डायर वुल्फ के अवशेषों से प्राप्त किया गया है

क्या ये सचमुच डायर वुल्फ हैं?

इन पिल्लों को “भयानक भेड़िया” कहा जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञ इन्हें “जेनेटिकली मॉडिफाइड ग्रे वुल्फ” मानते हैं। दरअसल, वैज्ञानिकों ने ग्रे वुल्फ के डीएनए में डायर वुल्फ के लक्षण जोड़ने के लिए करीब 20 जीन संपादित किए हैं।

खास नाम और खास पहचान

इन पिल्लों में दो नर और एक मादा हैं:

  • रोमुलस और रेमस – रोम के संस्थापकों के नाम पर
  • खलीसी – ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ की मशहूर पात्र से प्रेरित

इनके वजन और आकार सामान्य भेड़ियों से कहीं अधिक है। रोमुलस और रेमस छह महीने के हैं और लगभग 36 किलोग्राम के हैं, जबकि खलीसी दो महीने की है और उसका वजन 11 किलोग्राम है।

पुनर्जीवन की प्रक्रिया

वैज्ञानिकों ने दो डायर वुल्फ के अवशेषों से डीएनए निकाला – एक 13,000 साल पुराना दांत और एक 72,000 साल पुरानी कान की हड्डी। इस डीएनए की मदद से ग्रे वुल्फ की कोशिकाओं को संपादित किया गया और फिर इनसे क्लोनिंग द्वारा भ्रूण तैयार कर, उन्हें पालतू कुतियों के गर्भ में प्रत्यारोपित किया गया। तीनों पिल्ले अलग-अलग कुतियों से जन्मे हैं।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण और उद्देश्य

कोलोसल की मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी बेथ शापिरो के अनुसार, “हमारा मकसद विलुप्त प्रजातियों की सटीक नकल बनाना नहीं, बल्कि उनके पारिस्थितिकीय योगदान को बहाल करना है।”

Dangerous Ice Age Predator Comes Back to Life विशेषज्ञों की राय

ऑस्ट्रेलिया के फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कोरी ब्रैडशॉ इस प्रोजेक्ट को लेकर संदेह जताते हैं। उनका मानना है कि यह परियोजना डायर वुल्फ को पूरी तरह वापस लाने में सक्षम नहीं है, लेकिन यह निश्चित रूप से थोड़ा संशोधित ग्रे वुल्फ बनाने में सफल रही है।

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संरक्षण और भविष्य की योजना

वर्तमान में ये पिल्ले 2,000 एकड़ में फैले एक सुरक्षित संरक्षित क्षेत्र में पल रहे हैं। भविष्य में ये 45 से 68 किलोग्राम तक भारी और 102 सेमी तक लंबे हो सकते हैं।

इतिहास और डीएनए विश्लेषण

डायर वुल्फ उत्तर और दक्षिण अमेरिका में फैले हुए थे, और इनका संबंध कृपाण दांतेदार बिल्लियों और विशाल भालुओं से था। कोलोसल के शोध से पता चला कि ग्रे वुल्फ इनके सबसे करीबी जीवित रिश्तेदार हैं और 99.5% डीएनए साझा करते हैं।

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सांस्कृतिक और पारिस्थितिक महत्व

शापिरो का मानना है कि डायर वुल्फ जैसी विलुप्त प्रजातियाँ सांस्कृतिक धरोहर और पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान के प्रतीक हैं, और इन्हें पुनर्जीवित करना मानवता के लिए एक मूल्यवान कदम हो सकता है।

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