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National Zoological Park Delhi: दिल्ली चिड़ियाघर में 16 साल बाद गूंजी दहाड़,शेरनी महागौरी ने दिए 4 शावक | एशियाई शेरों का बड़ा संरक्षण सफल

National Zoological Park Delhi

National Zoological Park Delhi में 16 साल बाद फिर से शेरों की दहाड़ गूंजी है। शेरनी महागौरी ने हाल ही में चार स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है, जो कि वर्ष 2009 के बाद एशियाई शेरों का पहला सफल प्रजनन है। यह घटना न केवल चिड़ियाघर के लिए बल्कि पूरे देश के वन्यजीव संरक्षण अभियान के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है

National Zoological Park Delhi शावकों की निगरानी में जुटा प्रशासन

चिड़ियाघर के निदेशक संजीत कुमार के अनुसार, महागौरी अपनी संतानों की अच्छे से देखभाल कर रही हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि शावकों के लिए शुरुआती 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए महागौरी और उसके चारों शावकों पर लगातार सीसीटीवी कैमरों के जरिए नजर रखी जा रही है। यह महागौरी की पहली डिलीवरी है, ऐसे में जरूरत पड़ने पर मेडिकल टीम भी तैयार है।

गुजरात से दिल्ली लाए गए थे महागौरी और महेश्वर

महागौरी और शावकों के पिता महेश्वर को साल 2021 में गुजरात के जूनागढ़ से दिल्ली लाया गया था। एशियाई शेरों की गिनती दुनियाभर में संकटग्रस्त प्रजातियों में होती है, जिन्हें इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) की रेड लिस्ट में लुप्तप्राय श्रेणी में रखा गया है। ऐसे में शावकों का जन्म संरक्षण प्रयासों की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

वन्यजीव संरक्षण को मिली नई ताकत

दिल्ली चिड़ियाघर पिछले कुछ महीनों में जानवरों की मौत और अन्य विवादों को लेकर चर्चा में रहा था। मगर अब इन चार नन्हें शावकों की किलकारी ने चिड़ियाघर में नई उम्मीदें जगा दी हैं। इससे पहले भी यहां शावकों का जन्म हुआ है — वर्ष 2023 में रॉयल बंगाल टाइगर के दो शावक और 2022 में तीन सफेद बाघ शावकों ने जन्म लिया था। अब महागौरी के बच्चों के आने से यह संदेश भी गया है कि भारत का वन्यजीव संरक्षण मिशन और मजबूत हो रहा है।

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निष्कर्ष

National Zoological Park Delhi में शेरनी महागौरी द्वारा 16 साल बाद चार शावकों को जन्म देना न सिर्फ चिड़ियाघर के लिए बल्कि पूरे देश के वन्यजीव संरक्षण अभियान के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। यह सफलता एशियाई शेरों की घटती संख्या को थामने की दिशा में बड़ा कदम है। शावकों का स्वस्थ रहना और उनका विकास भविष्य में अन्य संरक्षण परियोजनाओं के लिए प्रेरणा बनेगा। दिल्ली चिड़ियाघर में इन नई किलकारियों ने उम्मीद की एक नई रोशनी जलाई है, जो भारत के वन्यजीव संरक्षण मिशन को और भी मजबूत बनाएगी।

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