Vantara: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वनतारा पशु बचाव एवं पुनर्वास केंद्र का दौरा किया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के जामनगर में स्थित वनतारा पशु बचाव और पुनर्वास केंद्र का दौरा किया, जो 3,000 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। यह केंद्र विशेष रूप से उन बंदी हाथियों और वन्यजीवों के कल्याण के लिए समर्पित है, जिन्हें शोषण और दुर्व्यवहार से बचाया गया है।
प्रधानमंत्री ने इस यात्रा के दौरान पशु संरक्षण और पुनर्वास की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। वनतारा केंद्र, जो रिलायंस जामनगर रिफाइनरी परिसर के अंतर्गत आता है, इन जानवरों के लिए सुरक्षित आश्रय, पुनर्वास और चिकित्सा सेवाएं प्रदान करता है। इसके अलावा, यह केंद्र स्थानीय समुदायों को आजीविका के नए अवसर देने और मानवीय पशु देखभाल प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सहायता करने का भी कार्य करता है।

Vantara: केंद्र में 2,000 से अधिक वन्यजीवों का संरक्षण
वनतारा केंद्र में 43 प्रजातियों के 2,000 से अधिक जानवरों को सुरक्षित रूप से रखा गया है। यहां उन्नत पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं, और प्राकृतिक आवास की नकल करने वाले विशाल बाड़ों में जानवरों को रखा जाता है। इस केंद्र का प्रबंधन 2,100 से अधिक प्रशिक्षित कर्मचारी कर रहे हैं, जो पशु कल्याण को सुनिश्चित करते हैं।
सोमनाथ मंदिर में पूजा और राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक
वनतारा केंद्र के दौरे के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गिर सोमनाथ जिले पहुंचे, जहां उन्होंने सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने श्री सोमनाथ ट्रस्ट की बैठक की अध्यक्षता की, जो इस ऐतिहासिक मंदिर का संचालन करता है।
अपने गुजरात दौरे के अगले चरण में, प्रधानमंत्री सासण गिर में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) की बैठक का नेतृत्व करेंगे। इस बोर्ड में 47 सदस्य शामिल हैं, जिनमें विभिन्न राज्यों के वन्यजीव विशेषज्ञ, गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं।
गिर अभ्यारण्य में जंगल सफारी का आनंद लेंगे प्रधानमंत्री
सासण गिर में रात बिताने के बाद, प्रधानमंत्री मोदी सोमवार को गिर राष्ट्रीय उद्यान में जंगल सफारी करेंगे। इसके बाद, सिंह सदन लौटकर वह महिला कर्मचारियों के साथ संवाद करेंगे और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी विभिन्न पहलों पर चर्चा करेंगे।
प्रधानमंत्री का यह दौरा न केवल वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह भारत में सतत विकास और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
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